संकट के समय में देश की मदद करने वाले रतन टाटा के बारे में 5 रोचक बातें, जानकर हो जायेंगे हैरान

यह बात हम सभी जानते हैं की रतन टाटा देश के सबसे बड़े और बेहतरीन बिजनेसमैन में से एक हैं। बड़े इसलिए क्युकी वह देश की सबसे बड़ी कम्पनियो में से एक टाटा ग्रुप के मालिक हैं जो हर क्षेत्र में कार्यरत हैं और करोड़ो का बिजनेस करती है और बेहतरीन इसलिए क्युकी वह मुसीबत की हर घड़ी में देश की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं। रतन टाटा ने 21 साल तक देश की सबसे बड़ी कम्पनियो में से एक टाटा ग्रुप का नेतृत्व किया हैं और उनके समय में टाटा ग्रुप ने काफी विस्तार भी किया हैं। रतन टाटा देश के सबसे लोकप्रिय लोगो में से एक हैं लेकिन उनके बारे में कई ऐसी बाते हैं, जो सामान्य तौर पर लोग नहीं जानते और वही बाते हम आज इस लेख में बताएँगे।

रतन टाटा ने खरीदी थी टेटली चाय कम्पनी

रतन टाटा को जब टाटा ग्रुप का नेतृत्व करने का मौका मिला तब उन्होंने कई बड़े फैसले किये और उन फैसलों के द्वारा ही आज टाटा ग्रुप का नाम दुनिया की सबसे बड़ी कम्पनियो में शामिल हैं। रतन टाटा के द्वारा किया गया एक बड़ा फैसला ब्रिटिश चाय कम्पनी टेटली को खरीदना भी था। उनके इस फैसले की वजह से उन्हें यूरोपीय बाजार में अपनी सेल बढ़ाने का मौका मिला। जब उन्होंने टेटली को खरीदा था तो वह दुनिया की सबसे बड़ी दूसरी चाय कम्पनी थी। टेटली को खरीदने के बाद टाटा इस क्षेत्र में एक बड़ा नाम बन गया और उन्होंने यूनिलीवर जैसी बड़ी कम्पनियो को टक्कर देना शुरू कर दिया।

टाटा टी की बेहतरीन ब्रांडिंग से आया बदलाव

दुनि की दूसरी सबसे बड़ी चाय कम्पनी खरीदने के बाद टाटा टी एक बड़ा नाम बन चूका था और पूरी दुनिया में इसकी चाय बिक रही थी। भारत में भी टाटा टी एक बड़ा नाम बन रहा था। साल 2007 में अपने प्रोडक्ट टाटा टी के प्रमोशन के लिए कम्पनी के द्वारा एक शानदार केम्पेन चलाया गया जिसमे देश को ‘जागो रे’ कहके सम्बोधित किया गया। उस समय जिस तरह के एडवर्टाइजमेंट बनाये जा रहे थे उनमे भ्रष्टाचार और कई मुद्दों पर विरोध किया जा रहा था।  टाटा टी के यह एडवर्टाइजमेंट लोगो को काफी पसंद आये और वह प्रोडक्ट की तरफ आकर्षित हुए। इसके बाद टाटा टिया यूनिलीवर के प्रोडक्ट्स को तगड़ी टक्कर देने लगा।

नेनो की असफलता से सीखा सफलता का रास्ता

रतन टाटा देश को एक खुशहाल देश बनाने में यकीन रखते हैं। वह चाहते थे की देश के हर मध्यमवर्गीय परिवार के पास एक कार हो जिसमे वह आराम से सफर कर सके। यही कारण था की टाटा मोटर्स के द्वारा टाटा नैनो लॉन्च की गयी जो एक लाख की कीमत के अंदर आने वाली अफोर्डेबल कार थी। लेकिन यह कार एक बेकार मार्केटिंग की वजह से लोगो का दिल जितने में नाकामयाब रही। कार काफी कमजोर थी और जब इसे मजबूत बनाया गया तो इसकी कॉस्ट बढ़ गयी जिसकी वजह से इसका प्रोडक्शन 2019 में बंद हो गया। लेकिन रतन टाटा ने यह सीख लिया की उन्हें मजबूत और सुरक्षित कारे बनानी हैं जिसकी वजह से आज टाटा मोटर्स इतना बड़ा ब्रांड हैं।

फोर्ड को दिखाई थी औकात

एक समय ऐसा था जब टाटा मोटर्स काफी नुक्सान में थी। क्युकी कम्पनी काफी नुकसान में थी तो ग्रुप के सदस्यों और नजदीकी लोगो ने रतन टाटा जी से कहा की वह कम्पनी को बेच दे तो ऐसे में रतन टाटा कम्पनी को बेचने उस समय दुनिया की सबसे बड़ी कम्पनियो में से एक फोर्ड मोटर्स के पास गए जो हाल ही में बाजार को छोड़कर जा चुकी हैं। जब रतन टाटा टाटा मोटर्स को बेचने फोर्ड के पास गए तो फोर्ड के चेयरमैन ने उनसे कहा की वह उनकी कम्पनी खरीदकर उन पर एहसान ही कर रहे हैं। यह सुनकर टाटा बिना कम्पनी बेचे वापस आ गए और नुकसान दे रही कम्पनी को प्रॉफिटेबल बनाया। इसके बाद जब साल 2008 में फोर्ड दिवालिया होने की कगार पर आई तो रतन टाटा ने फोर्ड की लग्जरी कार निर्माता कम्पनी JLR अर्थात जैगुआर लैंड रोवर को खरीद लिया और फोर्ड को उसकी औकात बता दी।

जब सुनामी के दौरान टाटा ने की थी देश की मदद

साल 2004 में जब सुनामी आई थी तो रतन टाटा ने देश की मदद करने में कोई कसार नहीं छोड़ी थी। उस समय कम्पनी ने लोगो की मदद करने के एक बेहद ही सस्ता वाटर प्योरिफायर लांच किया था जिसका नाम सुजल रखा गया था। कम्पनी ने सुनामी के दौरान वाटर प्योरिफायर से पैसा कमाने की जगह पर इसे मुफ्त में हजारो लोगो को दिया जिससे की वजह स्वच्छ पानी की सुविधा प्राप्त कर सके। इसके बाद इस प्रोडक्ट की रिब्रांडिंग की गयी और आज के समय में ‘टाटा स्वच्छ’ देश के सबसे बड़े वाटर प्योरिफायर ब्रांड्स में से एक हैं। इसके अलावा रतन टाटा ने कई बार मुसीबत के समय में देश की मदद की हैं जैसे की हाल ही में कोरोना के दौरान उन्होंने 1500 करोड़ रूपये का दान दिया था।

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