Ratan Tata Birthday Special : जानिए झूठे बर्तन धोने और फावड़ा चलाने से लेकर अरबपतियों में सामिल होने तक का सफर

टाटा कंपनी की बागडोर जेआरडी टाटा के बाद सारा कार्यभार रतन टाटा जी ने संभाली है । इसके कमान को संभालने के अलावा बात करें रतन टाटा जी के विषम परिस्थितियों की तो इन्होंने अपने जीवन में बहुत से बुरी परिस्थितियां देखा है। उन बुरी परिस्थितियों में सबसे पहले उनके मां पिताजी का तलाक था, जिससे उनके जीवन में बहुत ही गहरा असर पड़ा था। फिर तलाक के बाद उनकी मां ने दूसरा विवाह कर लिया, जिससे रतन टाटा को स्कूल में उनके सहपाठियों द्वारा कई तानों को भी सहना पड़ा था।

इसके बाद भी रतन टाटा जी ने आज के वर्तमान समय में मशहूर उद्योगपतियों में अपना नाम कमाया है। टाटा कंपनी को पूरे विश्व के एक विशाल उद्योग के रूप में बनाने में रतन टाटा जी की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है । इतने महान व्यक्तित्व वाले रतन टाटा जी का आकर्षक विचार और उनकी सादगीपूर्ण जीवन वाकई में काफी आश्चर्यजनक है।

रतन टाटा जी की परवरिश आम लोगों की जैसे ही हुई है, जिसके वजह से वे आज भी जमीन से जुड़े रहने वाले व्यक्ति के रूप में नजर आते हैं। देखा जाए तो वे एक अमीर घराने में पैदा जरूर हुए हैं, परंतु अध्ययन से लेकर कैरियर तक का सफर एक आम लोगों के जैसे ही उन्होंने संघर्षों के साये में रहकर किया। आपको यह जानकर बेहद आश्चर्य होगा कि वे अपने पढ़ाई के खर्च को उठाने के लिए किसी होटल में जूठे बर्तनों को भी साफ करने का काम तक कर चुके हैं तथा आरंभ की नौकरी में फ़ावड़ा चलाने का भी कार्य शामिल रहा है।

आज ही के दिन महान शख्सियत रतन टाटा जी का का जन्म 1937 में हुआ था। जेआरडी टाटा के पास टाटा ऑफ टाटा कंपनी के कमान संभालने के पहले उनके जीवन में काफी हद तक अलग-अलग परिस्थितियों सामना करना पड़ा। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें आगे बढ़ने की सीख अपनी दादी से प्राप्त हुई है और इन्हीं सीख के वजह से ऐसी विषम परिस्थितियों को नजरअंदाज करके वे आगे बढ़े हैं।

रतन टाटा जी की उच्चतम शिक्षा संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से हुई है, जहां से उन्होंने आर्किटेक्चर की उपाधि ग्रहण की। उन्हीं दिनों में रतन टाटा जी को जहाज को उड़ाने का शौक था। अमेरिका में फीस को भर कर जहाज उड़ाने की सुविधा वाले कई सेंटर खुले थे।

उन्होंने उनके पास अपने शौक को पूरा करने के लिए एक सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ परंतु इसमें भी परेशानी की बात यह थी कि उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह इन सब की फीस भर सकें। तब उन्होंने विमान उड़ाने के शौक को पूरा करने के लिए अपनी फीस का इंतजाम छोटी मोटी नौकरियां करके की, जिसमें होटलों में जूठे बर्तन तक धोने की भी नौकरी शामिल है।

अपने परिवार के मुख्य व्यवसाय से जुड़ने से पूर्व इन्होंने जिस आर्किटेक्चर कंपनी में नौकरी की, वह संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में 2 वर्ष तक किया। 1962 में वह कंपनी से जुड़े तो उन्हें सब प्रथम नौकरी टेल्को में मिली, जिसे अब टाटा मोटर्स के नाम से जाना जाता है। उन्होंने इसके बाद टाटा स्टील के साथ अपने कैरियर का आरंभ किया।

टाटा स्टील कम्पनी में सबसे पहला नौकरी ब्लास्ट फर्नेस की टीम में कार्य करनी थी, जिस कार्य में रतन टाटा जी को फावड़े का उपयोग कर चूना पत्थर को उठाने का कार्य मिला। इसे उन्होंने बखूबी से निभाया । इसके अलावा आपको जानकार आश्चर्य होगा कि टाटा कंपनी का कारोबार 100 से अधिक देशों में फैला हुआ है पर यह सब रतन टाटा जी के वजह से मुमकिन हो सका है ।

About Vipul Kumar

मैं एक हिंदी और अंग्रेजी लेखक और फ़्रंट एंड वेब डेवलपर हूं। वंदे मातरम

View all posts by Vipul Kumar →

Leave a Reply

Your email address will not be published.