ना हस पाने की वजह से कितनी बार हुई जलील सुनी भली बुरी आज उसी के ऑटोग्राफ के लिए लगी होती है लाइन

कई बार हमारे अंदर ऐसी कमियां होती है जिसके कारण हमारा मजाक उड़ाया जाता है। न्यूजीलैंड में एक ऐसी ही महिला थी जिसकी एक कमी के कारण उनका काफी मजाक बनाया जाता था लेकिन उसी कमी ने आज उन्हें काफी मशहूर कर दिया है।

हम बात कर रहे हैं टायला क्लेमेंट की जो न्यूजीलैंड में रहती हैं और उन्हें एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण ना तो उनकी आंखों की पुतलियां हिलती है और ना ही उनके चेहरे पर हंसी आती है। लोग उनकी इस कमी का काफी मजाक बनाते थे लेकिन इस कमी की वजह से आज वह इतना मशहूर हो गई है कि लोग उनका ऑटोग्राफ लेने आते हैं।

न्यूयॉर्क की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार टायला की उम्र 24 वर्ष है और उन्हें मॉएबियस सिंड्रोम नामक एक बीमारी है जिसमें इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के चेहरे पर हंसी नहीं आ सकती और साथ ही उसकी आंखों में मौजूद पुतलियां और आइब्रोज नहीं हिलते हैं। टायला बताती है कि लोग अक्सर उनकी इस बीमारी की वजह से उन्हें मनहूस कहते थे जिसकी वजह से वह हमेशा उदास ही रहती थी।

आपको बता दें कि इस सिंड्रोम की बीमारी करीब 40 लाख लोगों में से केवल एक व्यक्ति को होता है। इस बीमारी में ग्रसित व्यक्ति के चेहरे में मौजूद मसल्स में अक्सर लकवा हो जाता है जिसके कारण इंसान अपने चेहरे के एक्सप्रेशन बदलने में नाकामयाब रहता है। डॉक्टरों के मुताबिक इस सिंड्रोम या बीमारी का स्थाई रूप से कोई इलाज नहीं मिला है।

मीडिया से बातचीत के दौरान टायला ने अपनी इस बीमारी के बारे में बताते हुए कहा कि बचपन में उन्हें काफी बुरा भला सुनाया जाता था लेकिन टायला ने इस सच को अपनी जिंदगी में पूरी तरह से स्वीकार कर लिया जिसके बाद उनकी जिंदगी में काफी बदलाव आ गया। आज टायला सोशल मीडिया पर इनफ्लुएंसर के रूप में उभर चुकी है। टायला क्लिमेंट नामक उनके इंस्टाग्राम पर करीब 18 हजार लोग उन्हें फॉलो कर रहे हैं।

आपको बता दें कि टायला ने पैरालंपिक रिकॉर्ड में अपना नाम भी शामिल किया है। मेलबर्न में साल 2018 को विक्टोरियन स्टेट चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था जिसमें टायला ने शॉट पुट थ्रो प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर पहला स्थान प्राप्त किया। इसी के अगले साल न्यूजीलैंड में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप में टायला ने गोला को करीब 8.28 मीटर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

टायला ने अपने इस हालत के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें अपने बचपन में और स्कूल में भी इस बीमारी के कारण काफी चिढ़ाया जाता था। उनके अनुसार कई बच्चे उनके चेहरे से डरने की बात भी किया करते थे। उसके साथ की टायला की टीचर उसके साथ अलग व्यवहार किया करते थे। टायला ने बताया कि कोई भी टीचर उनसे सवाल पूछने से पहले ही इग्नोर करते थे।

हालांकि टायला ने अब अपनी इस सिंड्रोम या बीमारी को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है और उनका मानना है कि उनकी ना हंसने की कमी ही उनके लिए एक वरदान बन गई है। वह इस बात से काफी खुश है कि वह अपनी जिंदगी की मदद से दूसरों को प्रेरणा दे रही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उनके अभिभावकों ने भी कई सर्जरी की मदद से उनके इलाज की कोशिश की थी लेकिन टायला की इस बीमारी में कोई सुधार नहीं आया। अब टायला अपनी जिंदगी से लोगों के बीच प्रेरणा का एक स्रोत बन चुकी है और उनसे प्रभावित हो कर लोग ना केवल उनकी जिंदगी से सीख ले रहे हैं बल्कि कई लोग उनसे ऑटोग्राफ लेने भी पहुंचते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *