आखिर क्यों सोशल मीडिया पर धमाल मचा रही एक सिपाही की तस्वीर, जानिए तीस डाकुओं का मरने का सच

Bishnu Shrestha Maurya

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक सैनिक की तस्वीर वायरल हो रही जिसमे ये बताया जा रहा है की ये सैनिक भारतीय सेना का साहसी सैनिक बिष्णु श्रेष्ठा है

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सैनिक के हाथ में एक मेडल और शरीर पर आर्मी की वर्दी सुशोभित है। तस्वीर के साथ ये सुचना भी दी जा रही है की इस भारतीय सेना के इस बहादुर सैनिक ने अकेले 40 डाकुओं को मात दी और एक लड़की का बलात्कर होने से भी बचाया । बिष्णु श्रेष्ठ ने 40 में 8 सैनिकों को मौत का घाट उतार दिया और 3 को बुरी तरह घायल कर दिया ।

कैप्शन में दी गई जानकारी के अनुसार ये घटना 2 सितंबर 2010 मौर्य एक्सप्रेस ट्रेन की है जिसमें डाकू ने चलती ट्रेन पर यात्रियों के साथ लूटपाट की घटना को अंजाम देना चाहा और साथ ही 18 वर्षीय युवती का उसके माता पिता के सामने बालात्कर करने की कोशिश की बिष्णु श्रेष्ठा ने इस बात का विरोध किया और डाकुओं से अकेले ही भिड़ गए। बिष्णु श्रेष्ठा ने अपनी ये लड़ाई अपने जज्बे और मात्र एक खुखरी की से जीती।

आधा सच आधा फसाना

सूत्रों के मुताबिक इस खबर में आधी सच्चाई दिखाई गई है दरअसल पोस्ट में दिखाई जा रही तस्वीर भारतीय सैनिक बिष्णु श्रेष्ठा की नही बल्कि ब्रिटिश की सेना के एक नामी सैनिक दीपप्रसाद पुन की है जो गोरखा के रॉयल रेजिमेंट पर तैनात थे जिन्होंने 2011 में 2 जून को 30 से जायदा तालिबानियों से अकेले युद्ध किया था।

जिसके लिए उन्हें क्वीन एलिजाबेथ द्वारा सम्मानित भी किया गया था। हालांकि भारतीय सैनिक बिष्णु श्रेष्ठा के बारे में जो कहानी दिखाई गई है वो बिलकुल सच्ची है । बिष्णु श्रेष्ठा की बहादुरी को देखते हुए भारतीय संगीतकार और निर्देशक हिमेश रेशमिया ने उनकी आत्मकथा बनाने के घोषणा भी की थी ।

बिष्णु श्रेष्ठा का सच

दरअसल खोज के बाद पाया गया की 2 सितंबर 2010 को बिष्णु श्रेष्ठा मौर्य किसी एक्सप्रेस रेलगाड़ी में सफर कर रहे थे जिसमे 30 से 40 डाकुओं ने हमला कर दिया और डाकुओं ने यात्रियों से लूट पाट और एक युवती से बलात्कार करने की भी कोशिश की और यह सब देख कर बिष्णु श्रेष्ठा उन डाकुओं से अकेले भिड़ गए और 3 डाकुओं को मात के घाट उतार दिया और लगभग 8 को घायल कर दिया अनकिनिस वीरता के लिए उन्हें 2 वीरता पदक भी मिले ।

गोरखा गौरव

गोरखा नेपालियों का एक समुदाय है जो ज्यादातर हिमालय और उसके आस पास के हिस्सो में निवास करते हैं । गोरखा अपने साहस और बहादुरी के लिए जाने जाते हैं ये नेपाल के साथ साथ ब्रिटिश और भारतीय सेनाओं में भी तैनात होते रहते हैं। खबरों से यह बात तो निश्चित है की ये तस्वीर भारतीय के किसी भी बिष्णु श्रेष्ठा नामक सैनिक की नही है किंतु उनके विषय में सुनाई गई कहानी सच है ।
यह दोनो सैनिक बिष्णु श्रेष्ठा और दीपप्रसाद पुन गोरखा है और सैनिकों की कहानियां बहुदुरी की मिसाल हैं ।

About Vipul Kumar

मैं एक हिंदी और अंग्रेजी लेखक और फ़्रंट एंड वेब डेवलपर हूं। वंदे मातरम

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