जापानी कला में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं किंत्सुगी और उसकी समकालीन कलाकृतियां, यह है वास्तविक कहानी

Kintsugi japan

मानव के जीवन तथा अंग कोमल है और वह नश्वर भी होते हैं। इसीलिए मानव भी एक निर्मित तथा प्रकृति की वस्तुएं हैं। ये सिर्फ जीवन के चक्र होते है। इस लोक पर सदैव कुछ भी नहीं रहते। इसीलिए तो यह हमें पर पूरी तरह आश्रित करता है कि हम अपने जीवन को पूर्ण रूप से महत्वपूर्ण बनाकर और जो भी कीमती क्षण हमारे लिए होते हैं उनकी हम प्रशंसा करते हुए आगे बढ़ते चले।

जापान की कला है कितसुगी 

यह हमारी जिंदगी सफर के वक्त यह हमें एक चुनौती दे सकती है तथा बदन पर और साथ ही अंदरुनी दाग छोड़ सकते हैं। इंसानी अंगों में प्रत्येक निशानी एक याद के तौर पर होती है जो हमें अतीत की कहानियों से रूबरू कराती है। हम चाहे अतीत या अपनी पिछली जिंदगी से कितनी भी दूर भाग जाए पर उनके भरे हुए सीख हमें कभी नहीं भूलने चाहिए। कहा जाता है कि जापान में वहां की कला जिसे किंतु संगी से जाना जाता है उसके हर वस्तुओं में अपने खुद के एक अहम निशान मौजूद होते हैं। जो कि कलाकृति और खूबसूरती में अनुपम और अद्भुत मालूम पड़ते हैं।

कितसुगी का वास्तविक अर्थ

पूरी और अधूरी विचारधारा के मकान होने की वजह से कितसुगीं जैसे मिट्टीयों का बर्तन का टूटा हुआ टुकड़ा एक समान की तरह साथ रखना और पूरी तरह से आपदाग्रस्त पडे साका को भी बड़े ही सुनहरा रंग वाले पाउडर के साथ उसका उत्थान कराए जाने की एक कला मानी जाती है। कित्सुगी जिसका अर्थ यह माना जाता है कि यह दर्शन मे सोना के साथ जुड़ा हुआ एक अहम हिस्सा है जिसकी उत्पत्ति 2 शब्दों कीत और सुगी के समिश्रण से बना है। मैं कित्सुगी की उत्पत्ति का स्वरूप का आधार और साथ ही उसके दर्शन और कलाओं के साथ उनके अभ्यासों को एक तकनीक के रूप में और उनकी सहायता से ही पता लगाना की इच्छा रखता हूं।

Kintsugi का उत्पत्ति की कहानी

15 वीं शताब्दी के दौरान एक बड़े ही प्रचलित कहानी जो बताए जाते हैं उसके अनुसार मोरोची काल में मेंशोगुनेट अशिगाका नाम के एक व्यक्ति के हाथों से एक चाय की कब टूट जाती है और कहा जाता है कि जो टुकड़े उन्होंने बटोरे उन्हें इकट्ठा करके वह चीन भेज देता है और वहां पर एक ऐसा दुर्भाग्य होता है जिसकी वजह से वह वहां से टुकड़ों सहित वहां से वापस भेज दिए जाते है। लौटकर आने के दरमियान वह निराशा महसूस करते हैं।

तभी उसे एक ऐसी चीज दिखाई देती है जिसमें एक धातु से बनी हुई एक स्तर पर जो उसके साथ ही एक सहायक पैचों के मदद से पूरी तरह जुड़ी हुई दिखाई पड़ती है। उसके बाद वह वहां के कारीगरों से उसे ठीक करने के लिए कहता है। फिर देखते ही देखते उसके मरम्मत के बाद एक सुंदर रूप के साथ तैयार होकर आती है और इस हल के साथ ही वह खूबसूरत वस्तु कितसुगी के नाम से मशहूर होने लगती है और इसी प्रकार से कितसुगी नाम पड़ता है।

कितसुगी का एक दर्शन

किसी भी तरह से टूटे हुए टुकड़ा का सिर्फ जुड़ाव नहीं बल्कि है अजय सय तकनीक भी है। इनके बाहर वाले दर्शन के तो और भी कई मजेदार और दिलचस्प किस्से है। कहा जाता है कि बोधिधर्म मे भी अपनी जड़ों को ढूंढते हुए कितसुगी दुनिया को एक अलग रूप से देखने के लिज भी एक नजरिया प्रदान करती है। अगर प्राथमिक बात कही जाए तो गुण दोषो को जिंदगी की प्रशंसा के साथ जोड़ने का एक मूल एवं रूपक सूची है। साथ ही यह संपूर्ण विश्व को एक साथ समान दृष्टि से देखने का सुझाव भी देता है।

जापानी कलाम चाय के समारोह में महत्वपूर्ण है कितसुगी 

कित्सुगी के कला को दर्शाते हुए कोरेन के बबी-सबी के परिभाषा यह दर्शाते हैं कि यह जीवन तो एक चक्र के भांती है जिसके इर्दगिर्द हम घूम रहे हैं यह ईश्वर का दिया हुआ एक नया तोहफा है और दर्शन शास्त्रों में इसके विशेष प्राकृतिक गुण की हमें सराहना करने चाहिए और उनकी सुंदरता को अभिव्यक्त कर संक्रमण में हमें उनके लाभ उनके आनंद और उनके उदासी जीवन के हर एक अंशों को हमें भूल कर उनका जश्न मनाने की जरूरत है। हम हमेशा ही अपने जीवन में निरंतर बढ़ते रहने के परस्थिति में ही रहते हैं यह यह सुंदर शास्त्र आदर्श और दर्शन को भी आगे बढ़ाने का वीरा उठाता है। जिसका असर भी संस्कृति में जैसे कि कुसुम की व्यवस्था जापान में, जापानी कलाम चाय के समारोह और हाइकु मैं भी काफी अहम असर डालते हैं।

जीवन के कई बातों को बताता है कितसुगी 

यह संपूर्ण सजगता और प्रकृति के अहम भूमिका की प्रशंसा भी करते है। जापान की एक कलाकृति कित सुगी एक महत्व कला और साब सौहार्द का का प्रतीक है। कितसुगी नया प्रकृति के जीवन की कलाम पर और उनके कलाम उस साथ में रखकर उनके खामियों के साथ ही उनकी खूबियों तथा सुंदरता को तलाश करने में भी काफी प्रोत्साहित करते हैं दरअसल यही दर्शन है जो कितसुगी के कलाओं की भाषाओं को भली-भांति प्रतिशत दर पूरी तरह प्रभाषित भी करते है।

वबी बनाम सबी तथा कित्सुगियो का अंर्तज्ञान

व्यक्तिगत तौर पर भी अगर हम वबी और उसके साथी सबी के विचारधाराओं को भी देखा जाए तो हमें इस बात का आभास हो जाता है कि उनकी आयों में समानता और अंतर ज्ञान के भाव दिखाती है। हालांकि वबी भी का अर्थ बताया जाता है कि गरीबी है और वह निर्मल मन वैराग्य और यह भी एक शांति का एकमात्र प्रतीक होता है। सबी सुंदर और सांकेतिक रूप में उम्र को बढ़ाना और उसका क्षय को दर्शाने का काम करती है। धार नहीं बताई जा रही है वह दरअसल दोनों को पूरक और संपूरक बनाती है। यह नकारात्मक शब्दो पर इन्हें सकारात्मक पहलुओं के साथ जापान के लोकमात्र संस्कृति में इसके महत्व को दर्शाती है।

किंत्सुगी और वर्तमान की दुनिया

हमारे वर्तमान और विश्व भर की डिजाइन तो हमारे होश को पूरी तरह से खफा देती है। जैसे हमारे मॉल को ही मान लिया जाए वह हमारे मन को बहुत ही ज्यादा प्रभावित करती है तथा उन्हें ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किए जाने के लिए भी प्रेरित करती है। जो लोग नए-नए चीजों को हमेशा खरीदते रहने की लगातार कोशिश करते रहती है उनकी प्रेरणा स्रोत में यह कितसुगी उनके लिए प्रेरित नहीं साबित नही होते है। यह कलर दर्शन हम हैं और पुरानी विचारधाराओं को छोड़कर और उनके बदले में नई विचारधाराओं के साथ नई तकनीकी सोच के साथ हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

जापान की कलाकृतियों का स्वरूप 

दरअसल हमारे बाहरी सुख जो हमारे आसपास भौतिक जीवन के ग्रुप बने हुए हैं उन से परे हटकर इनसे अलग होकर हमें मानसिक अध्यात्मिक चेतन और साथ ही कर्मिक वस्तुओं की ओर शिक्षा को साक्षी मानकर आगे बढ़ने का एक मतलब प्रदान करता है यही इनकी मूलभूत और एकमात्र सोच है जो दर्शन में और जापान की कलाकृतियों में कई बार दर्शायी जा चुकी है। यह कला हमें बताती है कि यह जीवन अद्भुत है नया है इन्हें हम खूबसूरत और बेहतर बनाएं।

Kintsugi के एक अद्भुत तकनीक 

यदि हम कला के मानसा से ही समझे तो कितसुगी की तकनीक जोड़ने यानी कि टूटी हुई चीजों को जोड़ने और उसकी मरम्मत करने के साथ-साथ उन्हें संपूर्ण ढांचा में डालकर उन्हें अद्भुत रूप देने की कला इनकी कलाकृति को और इनकी संस्कृति को सापेक्ष रूप में दर्शाती है। कितसुगी को टूटी हुई टुकड़ी को जोड़कर उसे सुंदर रूप देने की प्रक्रिया में यह बात बताई जाती है कि यह सिर्फ मिट्टी की तरह ही एक पात्र होते है दरारों को भरने के अलावा उनके परत को भी पूरी तरह से ढक देती है जिसके कारण उसके कोट को जोड़ने में काफी मदद मिलती है ऐसा कहा जाता है कि इस प्रक्रिया में हप्तों लग जाया करते और साथ ही यह भी बताया जाता है कि इनके परतों में सुंदरता दिखाई देती रहे, इसीलिए इन पर एक किस्म का लेप भी लगा दिया जाता हैं। बाद में उसमें सुनहरे रंगों के और चमकीले चांदी के रंगों के पाउडर का इस्तेमाल कर दिया जाता है जो इनकी खूबसूरती लंबे समय तक बनाए रखती हैं।

किन्त्सुगी के इक कलात्मक रुपी भाषा

 

साकी- ए तकनीक का जो एक कलात्मकता समाज से और भी अधिक संबंधित रखते है और साथ ही उसमे इसका जो भी उपयोग हो वह एक पूरी चित्रण के रुप मे किये जाते है। ” माकी” दरअसल एक ऐसा शब्द होता है जिसका मतलब या जिस का मूल अर्थ छिडकाव से संबंधित होता है छिड़काव का एक प्रकार जो कि एक परीपूर्ण तस्वीर को भक्ति दर्शाने का कार्य करती है।

उनके कामो में और उनके कलाकार लाख का जो बर्तन होता है उसमें अलग-अलग तरह के बहुत से खूनी लाल रंग रखकर उसे पूरी तरह से सुडोल और आकर्षक रूप मे भी सजाए जाते हैं।इस सजावट के कारण से ही माकी काया एक तकनीक एक उदाहरण के तौर पर पेश होती है। हालांकि सजाए गए या तरीके से कित्सुगी कि वह जो एक अवधारणा कलात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं वह इसी कला का ही एक अहम हिस्सा और महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।

समकाल मे कलाकृति और कलाकारों मे किंत्सुगी के प्रभाव

किसी भी कला मे ना केवल जापानी संस्कृति को बल्कि उनके कलाकारों द्वारा बनाए गए उनके सभी कलाकृतियों और उनके व्यवसाय को भी दर्शाती है। उनके बुनने बनाने जोड़ने अविष्कार और चीजों के साथ अद्भुत चीजें बनाने के यह कलाकारी समकालीन इतिहास पर काफी प्रभाव छोड़े हैं हालांकि इनके कई साक्ष्य भी जापान के इतिहास में पाई गई है इससे यह पता लगता है कि यह कलाकृति इतिहास पर कहीं गहरे प्रभाव छोड़ते हैं और कई तरह के कामों का जगह भी लेते हैं।

कित्सुगी पर आखिरी शब्द

नतीजों के रूप में कितसुगी की जो कला है जापानी संस्कृति तथा उनके दिमाग को एक विशेष रूप में और नायाब तरीके से भी पेश करने का एक उचित दर्शन प्रदान करती है यह दरअसल हमें यह याद दिलाती है कि उनकी ताकत और उनके आविष्कार दुनिया के इतिहास में और अजमाए जाने वाले कामों में किस हद तक हमारी मदद कर सकती है।

शास्त्र में भावनाओं को परिचय देने वाले तकनीक

इसके अलावा भी इसका कुछ न्यून में दर्शन भी है जो हमारे कमजोरियों की भी भरी बातें दर्शाता है और यह हमें याद भी दिलाता है कि सभी परंपरा और प्राचीन सभ्यता संस्कृति को गले लगा कर और विश्वास के साथ सुदृढ़ होकर हमें प्रोत्साहित करते रहने की आवश्यकता है। कलाकारों को पूरी तरह प्रभाव कर तथा उसे जारी रखने के लिए शायद कोई ऐसी तकनीक के रूप में भी विकसित किए जा सकते हैं कि जो ना केवल हमें एक तकनीक के रूप में बल्कि एक पूर्ण रूप दर्शन के शास्त्र में भावनाओं को दुनिया के सामने एक अलग रूप में स्थापित कर सके और उनका परिचय भी दे सके।

अंतर्ज्ञान के प्राप्ति की आवश्यकता

हालांकि आज भी दुनिया भर में अलग करने और अकेलापन की भावना पूरी तरह से आज भी प्रचलित है। कलाकृति की व्याख्या करते हुए हम यह बात पूरी तरह से कह सकते हैं कि कि हमारे बीच सुलह होने की हमारे आवश्यकता हमारे व्यक्तित्व और संस्कृति को एक करने की क्षमता रखती है जो हमें पूरी तरह से स्वीकार लेनी चाहिए। ऐसी स्थिति की जरूरत है जहां हम सिर्फ बुरी चीजों को नहीं बल्कि अच्छे पक्षों को देखकर समझ कर हमें हमें उन पर अंतर्ज्ञान की प्राप्ति की बहुत ज्यादा आवश्यकता है।

About Vipul Kumar

मैं एक हिंदी और अंग्रेजी लेखक और फ़्रंट एंड वेब डेवलपर हूं। वंदे मातरम

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